Bihar Board class 10 Geography ch1 class notes | संसाधन, विकास और उपयोग | class 10 social science solutions
संसाधन, विकास और उपयोग
संसाधन:- संसाधन को कई रूपों में परिभाषित किया जा सकता है। मनुष्य अपने जीवन को सुखद-समृद्ध बनाने तथा अपने आर्थिक लाभ लिए जिन वस्तुओं का उपयोग करता है, जिनका निर्माण कुछ मूलभूत पदार्थों से होता है इन मूलभूत पदार्थों को संसाधन व कहते है।
दूसरी भाषा में :- मनुष्य अपनी व्यापक समझ और सुझ-बुझ से अपने तथा विश्व के पर्यावरण को बिना प्रभावित किए जिन प्रकृतिक वस्तुओं का उपयोग करता हो, तथा उस से प्रकृतिक को सामंजस्य बनाए रखता है उन्हे की ही मूल रूप से संसाधन कहते है।
भूगोल वेता जिम्मरमैन के अनुसार- संसोधन होते नहीं है बना करते है।
जैसे – कोई भी वस्तु जिसका उपयोग मानव नहीं करता था किसी भी तरह से जीवन शैली, सुखद न हों संसाधन नहीं होगा।
आजकल :- गायक, चित्रकार, साहित्यकार अपने कार्य से यानी कला का प्रदर्शन कर धेम कमाता है संसाधन है। मानव स्वंम भी संसाधन है।
★ संसाधनों का वर्गीकरण विभिन्न दृष्टिकोणों से किया जा सकता है।
पर्यावरण में कोई भी वस्तु उपलब्ध है को या तो प्रकृतिक है या फिर मानव कृत
(क) उपलब्धता के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं।
(1) प्रकृतिक संसाधन (2) मानवीय संसाधन
1.) प्रकृतिक संसाधन :- प्रकृतिक में आस्थिीत उपस्थित सारी भौगोलिक परिस्थितियाँ जो मनुष्य के कार्य पर व्यापक प्रभाव डालती हो प्राकृतिक संसाधन कहा जा सकता है।
जैसे, जलवायु, पवन, सौर ऊर्जा, वन एवं वन्य जीव मानव इत्यादि
2) मानवीय संसाधन :- प्रकृत की जिन वस्तुएँ का प्रयोग मानव अपने सुख-समृद्धि के लिए करके उनमें थोड़ा बदलाव कर या उसका प्रयोग वैसे ही करने लगता है। वह मानवीय संसाधन कहा जा सकता है।
जैसे:- सड़क, गाड़ी, भवन, रेल, पवन चक्की इत्यादि
(ख) उत्पत्ति के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं।
(i) जैव संसाधन (ii) अजैव संसाधन
- i) जैव संसाधन :- ऐसे संसाधन जिसकी प्राप्ति जैव मंडल से होती है। इनमें सजीव के सभी लक्षण’ मौजूद होते हो। जैव संसाधन कहलाते है।
जैसे मनुष्य, वनस्पत्ति, मछली, पशु एवं अन्य प्राणि समुदाय
(ii) अजैव संसाधन:- निर्जीव वस्तुओं के समूह को अजैव संसाधन कहते हैं।
जैसे, चट्टानें, धातु, खनिज आदि।
(ग) उपयोगिता या पुनः प्राप्ति के आधार पर भी संसाधन दो प्रकार के होते हैं।
(i) नवीकरणीय संसाधन ii) अनवीकरणीय संसाधान
(i) नवीकरणीय संसाधन वातावरण में उपलब्ध वैसे संसाधन जिन्हें भौतिक, रसायनिक या यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा समाप्त होने पर जल्द ही पुन:, प्राप्त किया जा सके नवीकरणीय संसाधन कहते है। जिन्हें सतत् या प्रवाह एवं जैव में वर्गीकृत किया जा सकता है।
जैसे सौर उर्जा, विद्युत आदि।
(ii) अनवीकरणीय संसाधन किसे कहते है:- ऐसे संसाधनों का विकास लंबी अवधि में जटिल “प्रक्रियाओं द्वारा होता है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में लाखों वर्ष लग सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे भी संसाधन होते हैं, जो पुनः चक्रिय नहीं हैं। एक बार प्रयोग होने के साथ ही वे समाप्त हो जाते हैं।
1.चक्रीय (2) अचक्रीय
जैसे पेट्रोलियम, जीवार जीवाश्म ईंधन
(घ) स्वामित्व के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं।
(i) निजी या व्यक्तिगत संसाधन (ii) सामुदायिक संसाधन (iii) राष्ट्रीय संसाधन (iV) अंतरराष्ट्रीय संसाधन
1.निजी या व्यक्तिगत संसाधन संस किसे कहते है। → ऐसा संसाधन जिस पर किसी व्यक्ति विशेष के। अधिकार हो, चाहे वह उसके बदले सरकार को लगान (Tax) देता हो या नही व्यक्तिगत संसोधन कहलाता है।
जैसे- जमीन, मकान, मोबाइल फोन, मोटर साइकिल इत्यादि ।
(ii) सामुदायिक संसाधन :- ऐसा संसाधन जिस पर किसी खास सामुदाय का अधिकार हो और उसका उपयोग भी उस समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता हो’ सामुदायिक संसाधन कहलाता है।
जैसे, पंचायत भवन, खेल का मैदान, मंदिर, मस्जिद विद्यालय, तालाब’ इत्यादि ।
(iii) राष्ट्रीय संसाधन:- वैधानिक रूप से किसी राज्य या देश की सीमा के अंदर सभी प्रकार के संसाधनों पर उस राज्य या देश का अधिकार होता है तथा सागर तटों के पास 12 समुद्री मील, अर्थात 22.2 km, तक के महासागरीय क्षेत्र में जाय पाए जाने वाले संसाधन राष्ट्रीय संसाधन है।
(iii) अंतरराष्ट्रीय संसाधन :- ऐसे संसाधनों का नियंत्रण अंतरराष्ट्रीय संस्था करती है। तट रेखा से 200 km की दूरी छोड़ कर खुले महासागरीय संसाधनों पर किसी देश का अधिकार नही होता है। ऐसे संसाधन का उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था कि की सहमती सहमति जरूरी होता है।
★ आर्थिक अपवर्जक क्षेत्र :- किसी देश की तट रेखा से 200 समुद्री मील की दूरी तक के क्षेत्रों को उपवर्गक आर्थिक क्षेत्र कहलाता है।
(ङ) विकास के स्तर के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते है।
(ii) संभावी संसाधन (ii) विकसित संसाधन (iii) भंडारित संसाधन (iv) संचित कोष संसाधन
(i) संभावी संसाधन किसे कहते हैं।
उत्तर – ऐसे संसाधन जो किसी क्षेत्र विशेष में मौजूद होते है। जिसे उपयोग में लाये जाने की संभावना रहती है। इसका उपयोग अभितक नहीं किया गया हो।
जैसे:- हिमालयी क्षेत्र का खनिज । राजस्थान और गुजरात क्षेत्र में पवन और सर ऊर्जा की संभावना।
(ii) विकसित संसाधन किसे कहते है। उत्तर- ऐसे संसाधन जिनका सर्वेक्षणोपरांत उपयोग हेतु मात्रा एवं गुणवत्ता का निर्धारण हो चुका है। जैसे उसम, बोम्बे हाई, गुजरात के तेल कूपों से ले पेट्रोलियम निकाला जा रहा हो।
(iii) भंडार संसाधन क्या है। उत्तर- ऐसे संसाधन पर्यावरण में उपलब्ध होते है तथा मानव के आवश्यकता के लिए सक्षम है परन्तु उसको प्राप्त करने की सही प्रोद्यौगिक का विकास नही हो पाया हो भंडारित संसाधन है तथा इसका उपयोग भविष्य में किया जा सकेगा।
जैसे जल में ऑक्सीजन तथा ‘हाइड्रोजन का यौगिक है। जिस में ऊर्जा की असीम क्षमता निहित है।
(iv) संचित कोष संसाधन:- वास्तव में ऐसे संसाधन भंडार संसाधन के ही अंश है, जिसे उपलब्ध तकनिक के आधार पर प्रयोग में लाया जा सकेगा इसका तत्काल में उपयोग प्रारंभ नही है।
संसाधन नियोजन → संसाधनों का योजनाबद्ध, समुचित और विवेकपूर्ण उपयोग ही संसाधन नियोजन कहलाता है। तथा इसका सामान्य अर्थ है। अनउपयोगी गतिविधियों को कम करना।
* भारत में संसाधन-नियोजन:- संसाधन नियोजन एक जटिल प्रक्रिया है। इसकी नियोजन की कुछ प्रक्रियाएँ” निम्नलिखित है।
- देश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों की पहचान करना,
- ii) सर्वेक्षणोप्रांत, मानचित्र तैयार कर संसाधनों का एवं मात्रात्मक आधार पर आकलन करना’ गुणात्मक
(iii) संसाधान विकास योजनाओं को चरणबद्ध रूप से तैयार करना (v) राष्ट्रीय विकास योजना एवं संसाधन विकास योजना के विच समन्वय स्थापित करना
★ संसाधनों का संरक्षण:- संसाधनों का संरक्षण से यह आश्य है कि हमें अनावश्यक रूप से संसाधनों को नष्ट न कर अपने भावी पीढ़ी को वैसे हि सौंपे जैसे मुझे प्राप्त हुआ हो। महात्मा गाँधी के अनुसार हमारे पास पेट भरने के लिए प्रयाप्त संसाधान हो किन्तु पेटी भरने के लिए नही अर्थात लाला की संतुष्टी के लिए प्रयोप्त संसाधन नहीं है। J
* सतत विकास की अवधारणा :- सतत विकास का मतलब है भविष्य में आनेवाली पीढ़ीयों की आवश्यकता की पूर्वी को बिना प्रभावित किए वर्तमान पीढ़ी अपनी आवश्यकता की पूर्ति करें।