bihar board class 9th science ch 4 notes in hindi परमाणु-संरचना
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परमाणु की संरचना
परमाणु :-
- परमाणु पदार्थ के निर्माण खंड है। यह पदार्थ की सबसे छोटी इकाई है जो तीन उप – परमाणु कणणों से मिलकर बनी होती है:- प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन ।
- इससे पहले डाल्टन ने कहा था कि परमाणु अविभाज्य है यानी आगे विभाजित नहीं किया जा सकता है, जो कि उप – परमाणु कणों खोज से गलत साबित हुआ है।
इलैक्ट्रॉन की खोज :-
- इलैक्ट्रॉन की की खोज कैथोड किरणों सहायता से जे. जे. टामसन ने टामसन ने केयोड किरणों की मदद से परमाणु में इलैक्ट्रॉन की उपस्थिति के बारे में बताया ।
इलेक्ट्रॉन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :-
- इलेक्ट्रॉन पर आवेश =-6 X 10-19C
- इलेक्ट्रॉन पर द्रव्यमान :- 1 x 10-31 Kg
प्रोटॉन की खोज:-
- ई. गोल्डस्टीन ने उनके द्वारा प्रसिद्ध एनोड किरणों था केनाल किरणों के प्रयोग द्वारा परमाणु में धनावेशित कण यानि प्रोटॉन की खोज की।
प्रोटॉन के कुछ तथ्य :-
- प्रोटान पर आवेश = +6 X 10-19 C
- प्रोटॉन पर द्रव्यमान = -673 × 10-27 kg
- प्रोटॉन पर द्रव्यमान = 1840 x इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
न्यूट्रॉन की खोज :-
- जेम्स चैडविक ने हल्के तत्वों (जैसे – लीथियम, बोरोन इत्यादि) की कणों से साथ भिडंत करवाई, जिसके कारणवश एक नए कण जिनका द्रव्यमान प्रोटॉन के बराबर था, तथा वे आवेश रहित थे, की उत्पत्ति सिद्ध की | इन कणों को न्यूट्रॉन का नाम दिया गया ।
परमाणु मॉडल :-
- उप – परमाणुविक कणों जैसे की इलेक्ट्रॉन, प्रोट्रॉन और न्युट्रॉन की खोज के उपरान्त परमाणु के विभिन्न मॉडल दिए गए । उनमें से कुछ परमाणु के मॉडल इस तरह से हैं :-
(a) टॉमसन का परमाणु मॉडल
(b) रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल
(C) बोर का परमाणु मॉडल
(a) टॉमसन का परमाणु मॉडल :-
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- टॉमसन के इस परमाणु मॉडल को ‘ काटा तरबूज मॉडल ’ कहते हैं। टॉमसन के इस मॉडल में परमाणु धन आवेश तरबूज के खाने वाले लाल भाग की तरह बिखरा है जबकि इलेक्ट्रॉन धनावेशित गोले में तरबूज के बीज की भांति धंसे है।
- हालांकि इस मॉडल ने परमाणु के आवेशरहित अभिलक्षण की विवेचना की पर कुछ वैज्ञानिक को यम मॉडल नहीं समझ आया इसलिए इसे नकार दिया गया |
(b)रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल :-
- रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग में, तेज से चल रहे अल्फा (हीलियम नाभिक ₂He4) कणों को सोने के पन्नी से टक्कर कराई ।
रदरफोर्ड के प्रयोग के परिणाम :-
- ज्यादातर अल्फा कण बिना मुड़े सोने की पनी से सीधे निकल गए ।
- कुछ अल्फा कण निम्न कोणों से जूड़े |
- प्रत्येक 12000 कणों में से एक कण वापस आ गया।
रदरफोर्ड के प्रयोग के आधार पर निष्कर्ष :-
- अपने प्रयोग के परिणामों के आधार पर रदरफोर्ड ने निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले :-
(i) परमाणु के भीतर का अधिकतर भाग खाली है क्योंकि अधिकतर अल्फा कण बिना मूड़े सोने कि पत्नी से बाहर निकल जाते हैं।
(ii) परमाणु के बीच एक धनावेशित गोला है जिसे नाभिक कहा जाता है, क्योंकि 12000 मे से एक a – कण वापस आगया ।
(iii) क्योंकि ज्यादातर कण सोने की पन्त्री से सीधे निकल गए और कुछ ही कणों में झुकाव देखा गया, इस आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु के भीतर ज्यदातर भाग खाली है और नाभिक इस खाली भाग के बहुत छोटे से भाग में मौजूद है।
(iv) नाभिक का आयतन 10-5 गुणा परमाणु के आयतन के बराबर होता है।
रदरफोर्ड के प्रयोग की विशेषताएं:-
- अपने प्रयोग के आधार पर, रदरफोर्ड ने परमाणु मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं थी:-
(i) परमाणु का केन्द्र धनावेशित होता है जिसे नाभिक कहा जाता है।
(ii) एक परमाणु का सम्पुर्ण द्रव्यमान नाभिक मे होता है।
(iii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वलयकार मार्ग से चक्कर लगाते हैं।
(iv) नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में काफी कम होता है।
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कामयाँ:-
- रदरफोर्ड के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वलयाकार मार्ग में चक्कर लगाते है, किन्तु आवेशित होने के कारण, ये कण अपनी ऊर्जा निरन्तर खोते रहते हैं जिसके कारण वे अंतत: नाभिक में प्रवेश कर परमाणु को अस्थिर बनाते हैं।
- यर रदरफोर्ड परमाणु मॉडल की सबसे बड़ी कमी थी, जिसे रदरफोर्ड समझा नहीं पाया।
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बोर का परमाणु मॉडल :-
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- रदरफोर्ड मॉडल की कमी का निवारण बोर के परमाणु मॉडल से हुआ। नील्स बोर ने 1912 से परमाणु के बारे मे अपना मॉडल प्रस्तुत किया जिसमे निम्नलिखित तथ्य मौजूद है-
(i) इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉन की निर्धारित कक्षा कहते हैं।
(ii) इन निर्धारित कक्षाओं मे चक्कर लगाते हुए, ये इलेक्ट्रॉन अपनी ऊर्जा का विकिरण नहीं करते ।
परमाणु संख्या :-
- किसी भी परमाणु में प्रेटॉन की कुल संख्या का मान उसकी परमाणु संख्या कहलाते हैं |
- परमाणु संख्या ‘z ’ द्वारा प्रदर्शित की जाति है।
- किसी भी अनावेशित परमाणु में, प्रोटान तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है।
द्रव्यमान संख्या :-
- द्रव्यमान संख्या किसी परमाणु के नाभिक में मौजूद प्रोट्रान तथा न्यूट्रॉन की संख्या का जोड़ होती है।
- द्रव्यमान संख्या ‘A’ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
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संयोजकता :-
- बोरबरी नियम के अनुसार हमें ज्ञात है कि किसी भी परमाणु के अंतिम कोरा में ‘8’ इलेक्ट्रॉन भरे जा सकते हैं।
- हर तत्व अपनी बाहरी कोरा में 8 इलेक्ट्रॉन भरने के लिए, इलेक्ट्रॉन को अपने मे से मुत्तत या अन्य तत्वों मेसे से इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करते हैं।
समस्थानिक :- एक ही तत्व के ऐसे परमाणु जिनके परमाणु संख्या बराबर हो पर द्रव्यमान भिन्न हों। एसे परमाणु समस्थानिक कहलाते हैं।
समस्थानिक के उपयोग :-
- यूरेनियम समस्थानिक का उपयोग परमाणु संयंत्र मे ईंधन के तौर पर किया जाता है।
- कोबाल्ट का समस्थानिक कैंसर के उपचार में उपयोग किया जाता है।
- आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग घेघा के उपचार में किया जाता है।
- C-14 (कार्बन=14) का उपयोग कार्बन डेटिंग में किया जाता है।
समभारिक :- अलग – अलग तत्वों के ऐसे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्याएँ एक जैसी हों परन्तु संख्या भिन्न हो, समभारिक कहलाए जाते हैं।
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Class 9th: Ch 4 परमाणु की संरचना विज्ञान. विषय-वस्तु. पदार्थों में आवेशित कण; इलेक्ट्रॉन की खोज
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