bihar board class 9th civics ch 4 Notes | चुनावी राजनीति
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चुनाव :- चुनाव लोकतंत्र का एक अभिन्न अंग होता है क्योंकि चुनावों के माध्यम से ही लोग अपने जनप्रतिनिधियों को चुनते है ताकि सरकार का गठन हो और बाकी कामकाज हो । भारत में चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होते हैं।
चुनाव की जरूरत:- हमें चुनाव की जरुरत इसलिए होती है क्योकि चुनाव के द्वारा हम अपने शासक खुद चुन सकते है इसलिए ज्यादातर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्थाओं में लोग अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से ही शासन करते है
आम चुनाव:- 5 साल बाद सभी चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है, लोकसभा और विधानसभाएँ भंग हो जाती है, फिर सभी चुनावी क्षेत्रों में होने वाला चुनाव ‘आम चुनाव’ कहलाता है।
उपचुनाव :- किसी क्षेत्र के सदस्य की मृत्यु या इस्तीफे से खाली सीट के लिए चुनाव ‘उपचुनाव‘ कहलाता है।
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लोकतांत्रिक चुनावों के लिए जरुरी न्यूनतम शर्ते :-
- हर किसी को मताधिकार
- चुनावों में विकल्प उपलब्ध
- चुनाव का अवसर नियमित अन्तराल पर
- वास्तविक चुनाव
- स्वतंत्र और निस्पक्ष चुनाव
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निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरण:-
- चुनाव की घोषणा
- प्रत्याशियों का चयन
- नामांकन पत्र भरना
- चुनाव चिन्हों का आवंटन
- राजनीतिक दलों द्वारा चुनावी घोषणा पतत्र जारी काना
- चुनाव अभियान
- मतदान
- मतों की गणना
- परिणामों की घोषणा
राजनीतिक प्रतिस्पर्धा :- चुनाव सभी प्रतिस्पर्धा के बारे में है। प्रतिस्पर्धा के बिना चुनाव अर्थहीन हो जाएगा। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तब होती है जब विभिन्न राजनीतिक दल विश्वास हासिल करने और अन्ततः मतदाताओं का वोट हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। वे वादे करते है और मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन देते है।
चुनावी प्रतियोगिता के दोष :-
- यह हर इलाके में एकता और गुटबाजी और पार्टी राजनीति की भावना पैदा करता है।
- विभिन्न राजनीतिक दल और उम्मीदवार अक्सर चुनाव जीतने के लिए बूथ कैप्चरिंग जैसी गंदी चाल का इस्तेमाल करते है।
- चुनावी लड़ाई जीतने का दबाव उपयोगी दिर्घकालीक नीतियां बनाने की अनुमति नहीं देता है।
- प्रतियोगिता अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा में घसीटे जाने के विचार की ओर ले जाती है। इसलिए अच्छे लोग प्रवेश नहीं करते है और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में भाग नहीं लेते है|
चुनावी प्रतियोगिता के गुण :-
- नियमित चुनावी प्रतियोगिता राजनीतिक दलों और नेताओं को प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- अगर वे अपने काम से मतदाताओं को सन्तुष्ट कर सकते है, तो वे फिर से जीतने में सक्षम होगें।
- यदि कोई राजनीतिक दल केवल सत्ता में रहने की इच्छा से प्रेरित होता है, तो भी वह लोगों की सेवा करने के लिए मजबूर होगा।
- इससे राजनीतिक दलों की असली मंशा का पता चलता है।
- यह मतदाताओं को सर्वश्रेष्ठ में से चुनने का विकल्प देता है।
भारत में चुनाव :- हमारे भारत में हर 5 साल में लोकसभा तथा विधानसभा का चुनाव होता है। 5 साल के बाद चुने हुए सभी प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है। फिर सभी चुनाव क्षेत्रों में एक ही दिन या अलग-अलग अन्तराल में चुनाव होते हैं।
निर्वाचन क्षेत्र या सीटः- चुनाव के उद्देश्य से देश को अनेक क्षेत्रों में बाँट लिया गया है, इन्हें निर्वाचन क्षेत्र या सीट कहते है।
लोकसभा चुनाव में कुल सीटें:- लोकसभा में 543 सीटें है। अनुसूचित जातियों के लिए 84 और अनुसूचित जन जातियों के लिए 47 सीटें आरक्षित है।
सबसे बड़ा और सबसे छोटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र:- क्षेत्र के अनुसार देश का सबसे बड़ा लोकसभा निर्वाचन गाजियाबाद और सबसे छोटा निर्वाचन क्षेत्र चाँदनी चौक है।
मतदाता सूची :- मतदान की योग्यता रखने वाले लोगों की सूचि को मतदाता सूची कहते हैं
मतदान के लिए योग्य उम्र :- 18 वर्ष और उससे ऊपर की आयु वाले सभी नागरिक वोट डाल सकते हैं। यानी मतदान की योग्यता रखते है तथा न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।
चुनाव अभियान के विभिन्न माध्यम था साधन :-
- पोस्टर लगाना
- सभाएं करना
- भाषण देना
- जूलूस निकालना
- घर-घर जाकर मुलाकात करना
चुनावी नारें:-
- गरीबी हटाओं- इन्दिरा गांधी
- लोकतंत्र बचाओ- जनता पार्टी
- जमीन जीतने वालों को- वामपंथी दल
- तेलुगु स्वाभिमान – तेलुगु देशम पार्टी।
चुनाव आयोग :- भारत में चुनाव सम्पन्न कराने का कार्य एक निष्पक्ष व स्वतंत्र इकाई करती है, जिसे चुनाव आयोग कहते है।
भारतीय चुनाव आयोग के आधिकार:-
- चुनाव अधिसूचना जारी करने से लेकर नतीजों की घोषणा तक चुनाव प्रक्रिया का संचालन ।
- आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करना तथा उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों और पार्टीयों को दंडित करना।
- चुनावों के दौरान सरकार को दिशा–निर्देश मानने का आदेश देना।
- सरकारी आधिकारियों को अपने अधीन करके उनसे चुनावी काम काज लेना।
- जिन मतदान केन्द्रों पर चुनाव ढंग से नहीं हुआ हो, वहाँ दोबारा चुनाव काना।
भारतीय चुनाव आयोग के सामने चुनौतियां :-
- ज्यादा रुपये-पैसे वाले उम्मीदवारों और पर्टियों के गलत तरीकों पर रोकथाम ।
- अपराधिक पृष्ठभूमि और सम्बधो वाले उम्मीदवारों पर लगाम कसना।
- पारिवारिक संम्बधों की बुनियाद पर टिकट मिलने पर रोकथाम करना।
- मतदाता को चुनने के लिए ज्यादा से ज्यादा विकल्प उपलब्ध करना।
- छोटे दलों और नीर्दलीय उम्मीदवारों की परेशानियों का निपटारा।
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आचार संहिता: चुनाव अभियान के समय राजनीतिक दलों द्वारा पालन किए जाने वाले नियमों को चुनाव आचार संहिता कहा जाता है।
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स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए उठाये गये कदम :-
- चुनाव से पूर्व मतदाता सूचियों को ठिक करना
- सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर नियंत्रण
- मतदाताओं के लिए पहचान पत्र
- चुनाव पत्रि का जल्द निपटारा
- चुनाव में धन-बल के प्रयोग की जाँच
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Q- चुनावों के दौरान कोई भी उम्मीदवार या पार्टी क्या काम नहीं कर सकती हैं?
उत्तर- चुनावी कानूनों के अनुसार चुनावों के दौरान कोई भी उम्मीदवार या पार्टी निम्नलिखित काम नहीं कर सकती है:-
- मतदाता को प्रलोभन घूस या धमकी
- जाति या धर्म के नाम पर वोट मांगना
- चुनावी अभियान में सरकारी साधनों का इस्तेमाल
- लोकसभा चुनाव में एक क्षेत्र में 25 लाख या विधानसभा क्षेत्र में 10 लाख से ज्यादा खर्च।
- चुनाव प्रचार के लिए किसी धर्मस्थल का प्रयोग।
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